भारत सरकार
Government of India
Government of India
रक्षा मंत्रालय
Ministry of Defence
रक्षा लेखा नियंत्रक (निधि) मेरठ
Controller of Defence Accounts (Funds) Meerut

बारम्बार पूछे जाने वाले प्रशन

प्र.1 ब्याज दर- कार्यालय नियम पुस्तक भाग 5 का नियम 112,विभिन्न भविष्य निधियो के लिए समय समय पर लागू ब्याज दरे निम्नवत् है-

कार्यालय नियमावली 5 के नियम 112 के तहत
विभिन्न भविष्य निधि के तहत समय-समय पर प्रभावी ब्याज की दरें-
 
दिनांक 01-04-2017 से 30-06-2017 की अवधि हेतु ब्याज दर 7.9%
दिनांक 01-01-2017 से 31-03-2017 की अवधि हेतु ब्याज दर 8.0%
दिनांक 01-10-2016 से 31-12-2016 की अवधि हेतु ब्याज दर 8.0%
दिनांक 01-10-2016 से 31-12-2016 की अवधि हेतु ब्याज दर 8.1%
दिनांक 01-04-2016 से 30-06-2016 की अवधि हेतु ब्याज दर 8.1%
दिनांक 01-04-2015 से ब्याज दर 8.7% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-2014 से ब्याज दर 8.7% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-2013 से ब्याज दर 8.7% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-2012 से ब्याज दर 8.8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-12-2011 से 31-03-2012 की अवधि हेतु ब्याज दर 8.6%
दिनांक 01-04-2011 से 30-11-2011 की अवधि हेतु ब्याज दर 8.0%
दिनांक 01-04-2010 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-2009 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-2008 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-2007 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-2006 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-2005 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-2004 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-2003 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-2002 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-2001 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-2000 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1999 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1998 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1997 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1996 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1995 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1994 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1993 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1992 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1991 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1990 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1989 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1988 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1987 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1986 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1985 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1984 से ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1983 से रु.40000/- तक 8.5% एवं इससे अधिक की राशि पर ब्याज दर 8% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1982 से रु.25000/- तक 9.0% एवं इससे ऊपर की राशि पर ब्याज दर 8.5% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1982 से रु.25000/- तक 9.0% एवं इससे ऊपर की राशि पर ब्याज दर 8.5% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1982 से रु.25000/- तक 9.0% एवं इससे ऊपर की राशि पर ब्याज दर 8.5% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1982 से रु.25000/- तक 9.0% एवं इससे ऊपर की राशि पर ब्याज दर 8.5% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1982 से रु.25000/- तक 9.0% एवं इससे ऊपर की राशि पर ब्याज दर 8.5% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1982 से रु.25000/- तक 9.0% एवं इससे ऊपर की राशि पर ब्याज दर 8.5% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1982 से रु.25000/- तक 9.0% एवं इससे ऊपर की राशि पर ब्याज दर 8.5% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1982 से रु.25000/- तक 9.0% एवं इससे ऊपर की राशि पर ब्याज दर 8.5% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1982 से रु.25000/- तक 9.0% एवं इससे ऊपर की राशि पर ब्याज दर 8.5% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1982 से रु.25000/- तक 9.0% एवं इससे ऊपर की राशि पर ब्याज दर 8.5% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1982 से रु.25000/- तक 9.0% एवं इससे ऊपर की राशि पर ब्याज दर 8.5% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1982 से रु.25000/- तक 9.0% एवं इससे ऊपर की राशि पर ब्याज दर 8.5% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1982 से रु.25000/- तक 9.0% एवं इससे ऊपर की राशि पर ब्याज दर 8.5% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1982 से रु.25000/- तक 9.0% एवं इससे ऊपर की राशि पर ब्याज दर 8.5% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1982 से रु.25000/- तक 9.0% एवं इससे ऊपर की राशि पर ब्याज दर 8.5% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1982 से रु.25000/- तक 9.0% एवं इससे ऊपर की राशि पर ब्याज दर 8.5% प्रति वर्ष
दिनांक 01-04-1982 से रु.25000/- तक 9.0% एवं इससे ऊपर की राशि पर ब्याज दर 8.5% प्रति वर्ष
प्र.2 र.ले.नि.(निधि) को अन्तिम निबटान/अन्तिम आहरण हेतु प्रस्तुत किए जाने वाले कागजात की जांच सूची।
(i)
सीपीआरओ.33/62 के अनुसार निर्धारित फार्मो क,ख,एवं ग पर आवेदन पत्र।
(ii)
अन्तिम निबटान के मामले मे पिछली सीसीओ-9 के बाद मार्च के महीने से सेवानिवृत्ति/म्रत्यु/त्याग पत्र के महीनो तक के अभिदान का वसूली विवरण जिसे वेतन लेखा परीक्षा कार्यालय के लेखा अधि./वरि.ले.अ./द्वारा विधिवत् सत्यापित किया गया हो।
(iii)

पिछले ढाई वर्षो मे अभिदाता द्वारा लिए गए अस्थाई अग्रिम/अन्तिम निकासी का ब्यौरा जिसे वेतन लेखा अधिकारी द्वारा विधिवत् सत्यापित किया
गया हो।

(iv)
किसी दुर्घटना के समर्थन मे कार्यालय आदेश भाग-II की प्रति।
(v)
सक्षम वित्तीय प्राधिकारी की स्वीकृति/स्पेशल स्वीकृति
(vi)
अन्तिम आहरण/अन्तिम निबटान के दावे के साथ उस वर्ष की वर्तमान सीसीओ-9(मूल रूप में )
(vii)
अभिदाता/दावेदार/सक्षम वित्तीय प्राधिकारी द्वारा विधिवत् हस्ताक्षरित/प्रतिहस्ताक्षरित फुटकर बिल।
(viii)
फुटकर बिल के ऊपर भुगतान का तरीका(बैंक)/खजाने का नाम)
(ix)

इस आश्य का प्रमाण पत्र कि संबंधित कर्मचारी ने अन्य किसी केन्द्र/राज्य सरकार के विभाग में पुन:रोजगार पाने हेतु त्यागपत्र नही दिया है

अथवा उनकी अपनी कोई संस्था नही है अथवा उनके द्वारा कोई वित्तीय सहायता नही दी गई है।

(x)
डीएलआईएस के लिए मृत्यु के मामले में आवेदन पत्र पर वर्तमान वेतनमान।
(xi)
मृत्यु होने पर अव्यस्क नामिति के मामले मे अभिभावकता प्रमाण पत्र नही लगा है।
प्र.3 अभिदाता द्वारा भुगतान प्राप्त न करना।

कुछ कारण निम्नवत् हैं-

(i)
लेन-देन मे चैक का खो जाना अथवा यूनिट/फार्मेशन के लोक निधि खाते/अभिदाता के बचत बैक खाते में धनराशि का जमा न होना।
(ii)
चैक पर गलत खजाने का नाम दर्शाया गया हो ।
(iii)
यूनिट द्वारा चैक पर्ची प्राप्त न की गई हो अथवा यूनिट द्वारा चैक पर्ची खो गई हो-एसे मामलों में यूनिट को पता नही लग सकता कि किसे भुगतान हुआ है?
प्र.4 अन्तिम निबटान/अन्तिम आहरण की बाबत भुगतान मे देरी :

अभिदाताओं के अन्तिम निबटान/अन्तिम आहरण के दावे रक्षा लेखा नियंत्रक(निधि)के लेखा अधिकारी द्वारा निम्नलिखित कारणों से बिना मंजूर किए हुए लौटाए जा रहे हैं तथा उन्हे वेतन लेखा परीक्षा कार्यालय के माध्यम से पुन:प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है,यदि-

 

(i)
आवेदन पत्र सीपीआरओ 33/62के अनुसार निर्धारित फार्मो क,ख,एवं ग पर नही दिए गए हैं।
(ii)
अन्तिम आहरण/अन्तिम निबटान के कागजात वेतन लेखा परीक्षा कार्यालय के माध्यम से नही भेजे गए हैं।
(iii)
अन्तिम निबटान के मामले में पिछली सीसीओ-9 के बाद मार्च के महीने से सेवानिवृत्ति/म्रत्यु/त्याग पत्र के महीनो तक के अभिदान का वसूली विवरण जिसे वेतन लेखा परीक्षा कार्यालय के लेखा अधि./वरि.ले.अ/द्वारा विधिवत् सत्यापित किया गया हो।
(vi)
पिछले ढाई वर्षो मे अभिदाता द्वारा लिए गए अस्थाई अग्रिम/अन्तिम निकासी का ब्यौरा जिसे वेतन लेखा अधिकारी द्वारा विधिवत् सत्यापित किया
गया हो।
(v)
किसी दुर्घटना के समर्थन मे कार्यालय आदेश भाग-II की प्रति।
(vi)
सक्षम वित्तीय प्राधिकारी की स्वीकृति/स्पेशल स्वीकृति
(vii)
अन्तिम आहरण/अन्तिम निबटान के दावे के साथ उस वर्ष की वर्तमान सीसीओ-9(मूल रूप में )
(viii)
अभिदाता/दावेदार/सक्षम वित्तीय प्राधिकारी द्वारा विधिवत् हस्ताक्षरित/प्रतिहस्ताक्षरित फुटकर बिल।
(ix)
फुटकर बिल के ऊपर भुगतान का तरीका(बैंक)/खजाने का नाम)
(x)
इस आशय का प्रमाण पत्र कि संबंधित कर्मचारी ने अन्य किसी केन्द्र/राज्य सरकार के विभाग में पुन:रोजगार पाने हेतु त्यागपत्र नही दिया है अथवा उनकी अपनी कोई संस्था नही है अथवा उनके द्वारा कोई वित्तीय सहायता नही दी गई है।

(xi)
डीएलआईएस के लिए म्रत्यु के मामले में आवेदन पत्र पर वर्तमान वेतनमान।
(xii)
आवेदन पत्र पर जन्म तिथि,सेवानिवृत्ति की तिथि तथा नियुक्ति की तिथि नही दर्शाई गई है।
(xiii)
अभिदाता अगले 24 महीनो के दौरान सेवानिवृत्त नहीं हो रहा है।
(xiv)
डीएलआईएस के लिए म्रत्यु के मामले में आवेदन पत्र पर वर्तमान वेतनमान।
(xv)
नामांकन,रिकार्ड से मेल नही खा रहा है।
(xvi)
दूसरे नामिति(नोमिनी)द्वारा प्रस्तुत अन्तिम निबटान के कागजात तथा प्रथम नामिति के संबंध में प्रस्तुत मृत्यु के कागजात,अन्तिम निबटान संबंधी दस्तावेजो के साथ प्रस्तुत नही किए गए।
प्र.5 "निधि लेखाओ की वार्षिक विवरणी"अर्थात् सी.सी.ओ.-9 का प्राप्त न होना

निधि लेखाको की वार्षिक विवरणी अर्थात् सीसीओ-9 उन मामलो में मुद्रित किए जाते हैं जो रक्षा लेखा नियंत्रक निधि के ईडीपी केन्द्र मे अनुरक्षित अखिल
भारतीय निधि मास्टर में विधमान सभी मामलो के संबंध मे रखे जाते हैं बशर्ते संसाधन वर्ष से संबंधित लेन-देन की कार्रवाही वेतन लेखा परिक्षा कार्यालय द्वारा सा.भ.नि.अनुसूची अथवा मैगनेटिक माध्यम से डाटा प्राप्त हो जाएं। निधि लेखाओ के उन सभी मामलो मे जहा उपरोक्त मे से किसी माध्यम से लेन-देन प्राप्त हो गए हो,"निधि लेखाओ की वार्षिक विवरणी"एक ही तरह से तैयार किए जाते है और अभिदाताओ की उन यूनिटो जहां वे कार्य कर चुके होते हैं,को भेजे जाते हैं।

प्र.6 कैडिट का गुम होना। (क्रैडिट मिसिंग)

अभिदाता के सा.भ.नि.लेखे में अविधमान क्रेडिट के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं-

(i)
माह विशेष के लिए वेतन लेखा परीक्षा कार्यालय से सा.भ.निधि अनुसूचियों का प्राप्त नही होना।
(ii)
सेवा के किसी अन्य क्षेत्र से लेखा अन्तरण के मामले में,यधपि लेन-देन प्राप्त हो गए थे परन्तु मास्टर खोलने संबंधी कार्रवाई देर से की गई।
प्र.7 डैबिट का गुम होना। (डैबिट मिसिंग)

किसी अभिदाता के सा.भ.नि.लेखे में अविधमान डैबिट का मुख्य कारण इस प्रकार हो सकता है-

(i)
डैबिट अनुसूची में सा.भ.नि.लेखा संख्या का गलत दर्शाया जाना।
प्र.8 निधि लेखा का हस्तांतरण

भविष्य निधि खातो का हस्तांतरण निम्नलिखित स्थितियों में होता है-

(i)
जब रक्षा पक्ष (रक्षा लेखा विभाग सहित)के किसी अभिदाता का सिविल और अन्य विभागों/सेवाओं (राज्य सरकारों सहित)निगमो,
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों आदि में स्थायी रूप से स्थानान्तरण हो जाए।
(ii)
जब रक्षा (क्षेत्र)में ही एक लेखा परीक्षा क्षेत्र से दूसरे लेखा परीक्षा क्षेत्र में स्थानान्तरण हो जाएं जहा किसी अन्य लेखाधिकारी द्वारा निधि खातो का
रखरखाव किया जा रहा हो ।

(iii)
जब एक निधि खाते से दूसरे निधि खाते मे अन्तरण हो जाए चाहे लेखा अधिकारी बदला हो या नही।
जब किसी अभिदाता का,ऊपर बताए अनुसार स्थाई रूप से स्थानान्तरण हो जाता है तो उसका खाता बन्द कर दिया जाता है और शेष रकम संबंधित
लेखा अधिकारी को उसकी सहमति प्राप्त करके जहां आवश्यक हो अन्तरित कर दी जाती है।

जैसे ही लेखा अधिकारी को अभिदाता के सिविल और अन्य विभागों में स्थाई रूप से स्थानान्तरण सम्बन्धी सूचना प्राप्त हो तो यह देखा जाए कि क्या स्थानान्तरण स्थाई है जिसमें निधि खाते का अन्तरण भी शामिल हो। यदि स्थानान्तरण स्थाई हो तो अभिदाता के खाते को बन्द करने की कार्रवाही करनी चाहिये तथा अन्तिम क्रेडिट शेष निकाले जाने चाहिएं। क्रेडिट शेष जहां निबटारा लेखे प्रचलित हों वहां उनके माध्यम से सम्बंधित लेखा अधिकारी को अन्तरित किय जाते हैं अथवा सम्बंधित पक्ष से यथाआवश्यक सहमति प्राप्त करने के बाद रेखांकित चैक के माध्यम से भी क्रेडिट शेष अन्तरित किए जाते है। सम्बंधित लेखा अधिकारी को अन्तरित की गई राशि(इसमें अन्तरण पद्वति भी शामिल है)के पूर्ण ब्यौरें की सूचना देते हुए अलग से एक पत्र भी भेजा जाएगा जिसमें लापता क्रेडिट/डेबिट का भी उल्लेख होगा तथा इसकी पावती भी ली जाएगी।
खाते अन्तरित करते समय बताए गए क्रेडिट अथवा डेबिट भी यथाशीघ्र भेज देने चाहिएं।
किसी एक लेखा परीक्षा क्षेत्र से दूसरे में स्थाई स्थानान्तरण के मामले में जहाँ निधियों का अनुरक्षण किसी अन्य लेखा कार्यालय द्वारा किया
जाता है वहां नया लेखा अधिकारी अभिदाताओं को निधि में नए सिरे से शामिल करता है और उन्हें नई लेखा संख्याएं आबंटित की जाती है।

प्र.9 नामांकन में परिवर्तन

नामांकन का बदला जाना:
प्रत्येक कार्यालय यूनिट के अध्यक्ष को निधि लेखे का रखरखाव करने वाले लेखा अधिकारी को एक विवरण निर्धारित प्रपत्र पर भरकर दो प्रतियों में,व्यक्तिगत आवेदन फार्मो के स्थान पर प्रत्येक माह की 15 तारीख तक भेजना चाहिए । इस विवरण में प्रत्येक कार्यालय में सेवारत उस सरकारी कर्मचारी (राजपत्रित व अराजपत्रित दोनों)का विवरण दर्शाया जाएगा जिसके लिये भविष्य निधि में अभिदान करना अनिवार्य है। भविष्य निधि का नाम निर्धारित स्थान पर दिया जाना चाहिए अर्थात् नामावली और नामांकन फार्म दोनो पर ही यह विवरण 03 महीने पहले प्रस्तुत कर दिया जाना चाहिये ।नामावली की एक प्रति,आवंटित खाता संख्या दर्शाते हुए सम्बंधित यूनिट/कार्यालय को लौटा दी जाएगी

आवेदन पत्र तथा/अथवा नामांकन फार्मो की प्राप्ति के सबूत के तौर पर पावती निर्धारित फार्म में भेजी जाएगी जिसे अभिदाता को सुरक्षित रखने के लिए दे दिया जाएगा। अभिदाता उपयुक्त फार्म में अपना नामांकन फार्म कार्यालय अध्यक्ष के माध्यम से संबंधित लेखा अधिकारी को प्रस्तुत करेगा।
किसी अन्य फार्म मे किया गया नामांकन न्यायालय में विधि मान्य नही है। नामांकन परिवार के सदस्यों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के पक्ष में नही किया जा सकता ।

टिप्पणी 1- :
पुरूष अभिदाता के मामले में परिवार से अभिप्राय पत्नी /पत्नियां/माता पिता/बच्चे,नाबालिग भाई,अविवाहित बहनें,मृत बेटे की विधवा व बच्चे,जहां माता-पिता जीवित न हों वहां पैतृक दादा-दादी ।
टिप्पणी 2- :
महिला अभिदाता के मामले में परिवार से अभिप्राय पति,माता-पिता,बच्चे,नाबालिग भाई,अविवाहित बहनें,मृत बेटे की विधवा व बच्चे और जहां अभिदाता के माता-पिता दोनो ही जीवित न हों वहां पैतृक दादा-दादी ।
टिप्पणी 3-
बच्चें का अर्थ वैध बच्चा है और गोद लिया बच्चा भी शामिल है (जहां गोद लेना न्यायालय द्वारा मान्यता प्राप्त हो।)

यदि नामांकन करते समय अभिदाता का अपना कोई परिवार न हो और नामांकन अन्य व्यक्ति/व्यक्तियो के पक्ष में किया गया हो,तो नामांकन फार्म में यह उपबंध भी दे देना चाहिए कि उसका विवाह हो जाने के बाद यह नामांकन अविधि मान्य हो जायेगा ।
स्वीक्रति नामांकन फार्म निधि खाता स्वीकृत नामांकन फार्म निधि खाता संख्या क्रम में, निधि अनुरक्षण कार्यालय में एक गार्ड फाइल में राजपत्रित अधिकारी की व्यक्तिगत अभिरक्षा में तालाबंद रखे जाते हैं।

निधि - अनुरक्षण कर्यालय में नामांकन फार्मो का प्रत्यक्ष सत्यापन तीन वर्षो में एक बार किसी राजपत्रित अधिकारी द्वारा किया जाता है।

प्र.10 सा.भ.नि.लेखा सं.का आबंटन

सामान्य भविष्य निधि लेखा सं0 का आवंटन

संबंधित अभिदाताओं को निर्धारित फार्मो में आवेदनों के आधार पर भविष्य निधि मे प्रवेश दिया जाता है । भविष्य निधि में सभी प्रवेश उस मास के अगले कैलेण्डर मास की पहली तारीख से दिये जाते है जिसमे आवेदक प्रवेश पाने के लिये हकदार/प्रवेश पाने योग्य हो जाये बशर्ते कि निश्चित तारीख और कैलेण्डर मास की पहली तारीख साथ-साथ न पड़ती हों। ऐसे मामले में उसे उसी माह की पहली तारीख से निधि में प्रवेश दे दिया जाता है।

यूनिटों /विरचनाओं को नामांकन फार्म व आवेदन फार्म विधिवत् पूरे करके वेतन लेखा परीक्षा कार्यालय में प्रस्तुत करने चाहिए ।
वेतन लेखा परीक्षा कार्यालय फार्मो की निम्नलिखित जांच पड़ताल करेंगे-

(i)
कि उपयुक्त फार्म का प्रयोग किया गया है और आवेदन व नामांकन भागों/फार्मों में दिये गये स्थानों पर संबंधित भविष्य निधि का नाम भरा गया है ।
(ii)
कि आवेदन और नांमांकन भागों में सभी कालमो को विधिवत् व सही ढंग से स्याही या टाइप करके पूरा किया गया है ।
(iii)
कि दिये गए नाम व अन्य विवरण वेतन की दर और संगणनीय परिलब्धियों सहित,सही और हर दृष्टि से पूर्ण हैं।
(iv)
कि अभिदान की दर नियमानुसार सही दी गई है।
(v)
कि फार्म में की गई सभी काट-छांट आदि को विधिवत् सत्यापित किया गया है जिस पर संबंधित पक्षों के दिनांकित आधक्षर है।
(vi)
कि नामांकन नियमो के अधीन प्राधिकृत व्यक्तियो के नाम से किये गये है।
(vii)
कि नामितों के पूरे नाम और पते तथा उनका अभिदाता से संबंध बताया गया है।
आवेदन एवं नामांकन फार्म की जांच पड़ताल के बाद वेतन लेखा परीक्षा अधिकारी "जांच कर ली गई"शब्द अंकित करेगा और उस पर अपने दिनांकित हस्ताक्षर करेगा और स्वीकृति के परिणांम स्वरूप नामांकन हिस्सों पर इसके लिये दिये गये स्थान पर हस्ताक्षर करेगा। इसके बाद इन फार्मो को अग्रेषण पत्र के साथ आगे की कारवाई के लिये संबंधित लेखा अधिकारी को भेजेगा।

नामावली प्राप्त हो जाने पर अभिदाता को खाता संख्या नियत करेगा और प्रत्येक नामावली की एक प्रति में नामो के सामने विधिवत् खाता संख्या दर्ज करने के बाद उसे संबंधित वेतन लेखा पंरीक्षा अधिकारियों और संबंधित यूनिट/विरचना को लौटा देगा ।

प्रशासन प्राधिकारी/वेतन लेखापरिक्षा अधिकारियों को अराजपत्रित कर्मचारियों के मामले में उनकी सेवा पुस्तकों (सेवा अभिलेखो) और राजपत्रित अधिकारियों के मामले में उनके राजत्रित सेवा इतिवृत में उन्हे नियत की गई खाता संख्या दर्ज करनी चाहिए।

लेखा अधिकारी द्वारा आबंटित लेखा संख्या,खाते से संबंधित सभी पत्राचार में अंकित की जानी चाहिए।
प्र.11 निधि शेषों का भुगतान

अभिदाताओं को अपने लेखाओ के वार्षिक विवरणों में दिखाई गई रकम सही होने के बारे में अपनी तसल्ली कर लेनी चाहिए और यदि उसमें कोई गलती है तो उसकी रिपोर्ट वार्षिक विवरण प्राप्त हो जाने के तीन मास के भीतर लेखा अधिकारी/डीडीपी नियंत्रक को करनी चाहिए। सभी शिकायतों को ध्यान से देखा जाना चाहिए और यदि यह पता चले कि खातों में कोई विसंगति नही है तो सम्बंधित अभिदाताओ को सही स्थिति स्पष्ट कर देनी चाहिए। यदि कहीं विसंगति पाई जाये तो उसे ठीक कर लेना चाहिए और लेखाओं की संशोधित स्थिति की सूचना देनी चाहिए।

यदि मामले के संबंध में प्रशासन अधिकारियों को पत्र लिखना जरूरी हो तो उन्हें इन मामलों को यथा शीध्र भेज देना चाहिए और यथा शीध्र विसंगतियों का समाधान कर लेना चाहिए तथा अभिदाताओं को लेखाओं की संशोधित स्थिति की जानकारी दे देनी चाहिए।

लेखा विसंगतियों के तत्काल निपटारे के लिए अभिदाताओं को बैबसाइट के माध्यम से अपनी शिकायतें निम्नलिखित ईमेल के पते पर भेजनी चाहिए। "सीडीए फण्ड्स.निक,इन"